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सभी शक्तियां सभी शुद्धता सभी महानता - सब कुछ आत्मा में है। ~ स्वामी विवेकानंद आनंद और शांति की खोज मानव को सदा ही रही है । मनुष्य श्रेष्ठ जीवन जीना चाहता है तो उसे पुनः वही करना होगा जो उसके पूर्वजों ने किया था, अपने मूल अस्तित्व से जुड़ना । प्रकृति कि हर एक चीज केवल अपने स्रोत से जुड़कर ही स्थिर हो सकती है। अहंकार का त्याग कर हम अपनी इसी खोज की तरफ बड़े। तभी हम अपने जीवन को सार्थक कर पाएंगे। श्री महर्षि रमन ने कहा है "He who thinks he is the DOER is also the SUFFERER" और इसका केवल एक ही समाधान है जब हम अपने आत्मतत्व को शरीर से पृथक देख लेंगे, जैसे स्वामी विवेकानंद को उनके गुरु श्री रामकृष्ण परमहंस ने दिखाया था।